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Hello Readers, I read a intresting blog about our One Day Indian Cricket Team Captain Mahendra Singh Dhoni , And i found it really intresting and truth so want to share with you all... Here it goes : क्या सचिन से जलते हैं धोनी?सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए पहले फाइनल में सचिन ने 117 रनों की जो नाबाद पारी खेली, उसकी महानता हर देखने वाला जानता है। मैच के बाद जब सचिन का इंटरव्यू लिया गया तो सचिन ने अपने बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में नए खिलाड़ी रोहित शर्मा की प्रशंसा के पुल बांध दिए। यह सचिन का बड़प्पन है और टीम के प्रति उनका स्नेह है कि वे बखूबी समझते हैं कि नए खिलाड़ियों को कैसे बढ़ावा दिया जाए, कि कैसे अपनी महानता की छाया से उनके अच्छे प्रदर्शन को धुंधला न होने दिया जाए। और दूसरी तरफ हैं एक दिवसीय टीम के कप्तान धोनी। जब उनसे सचिन की पारी के बारे में पूछा गया तो टाल-मटोल भरे अंदाज में दो-चार बातें बोलने के बाद धोनी ने कहा “लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि अभी दो मैच और बाकी हैं।” तो धोनी यह कहना चाहते थे कि एक मैच में खेल लिया तो क्या, अगले दो मैचों में भी अच्छा खेलें सचिन तो जाने? ऎसी टिप्पणी करना धोनी का छोटापन था, दिल की जलन थी। धोनी शायद नहीं सहन कर पाते हैं कि उनके अलावा और कोई प्रशंसा का पात्र न बने, कोई और भारतीय क्रिकेट टीम का सिरमौर बने। इसीलिए पहले उन्होंने सौरव गांगुली को टीम से निकलवाया और फिर सचिन के खिलाफ कड़वी बातें कहीं और अब सचिन की तारीफ तक उनसे बर्दाश्त नहीं हो रही है। सचिन इस बात को बखूबी समझते हैं इसीलिए जीत कर वापस लौटते समय भी उनके चेहरे पर दुख की छाया थी, खुशी की मुस्कान नहीं। और इसीलिए वे जीत कर धोनी के साथ पेवेलियन वापस नहीं लौटे बल्कि धोनी से अलग, अकेले ही मैदान से लौटे। एक अंग्रेजी फिल्म में संवाद सुना था: “ मैं हमेशा इसलिए जीतता रहा क्योंकि मैं हमेशा अपनी जीत के बारे में सोचता रहा। तुम हमेशा इसलिए हारते रहे क्योंकि तुम हमेशा मेरी हार के बारे में सोचते रहे।” यही हाल धोनी का भी होगा। Well I Also Liked A User's Comment On This So Sharing That too : धोनी के चाहने वाले ये बताएं, ऑस्ट्रेलिया के इतने लंबे दौरे पर, जहां टेस्ट मैच, वन डे सीरीज और त्रिकोणीय श्रृंख्ला हुई, उसमें धोनी ने कितने रन बनाए? कितने शतक बनाए धोनी ने इस अग्नि परीक्षा जैसी सीरीज में? कितने मैचों में अपनी बैटिंग से जीत दिलाई टीम को? क्या सौरव गांगुली और राहुल द्रविड के बीच मतभेद नहीं थे, लेकिन दोनों ने कभी एक शब्द भी के दूसरे के खिलाफ नहीं कहा। और ये धोनी, हर मैच के बाद अपने खिलाड़ियों की, खास कर सचिन की आलोचना करते थे कि उसने अच्छा नहीं खेला। पहली बात, हर मैच जिताने का ठेका सचिन का ही है? तुम और युवराज क्या करने के लिए हो टीम में ? दूसरी बात, युवराज को अच्छा नहीं खेलने पर सवाल उठा तो धोनी उखड़ कर प्रेस कांफरेंस में बोले कि युवराज हर मैच खेलेगा। घर की टीम समझ रखी है इसे? और जो कप्तान इतना खुल कर पक्षपात करता हो अपने मित्र के प्रति, उसके लिए टीम के बाकी युवा खिलाड़ियों के मन में क्या इज्जत रह जाएगी? कप्तान नेतृत्व देने के लिए होता है। जो कप्तान इतने छुद्र विचार रखता हो और व्यवहार करता हो वह किसीकी इज्जत का पात्र नहीं बन सकता। और जिसकी इज्जत नहीं होती, वह नेतृत्व के लायक नहीं होता।
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